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सोमवार, 23 अप्रैल 2012

सौ शेर/ दोहा योजना के बारे में ...


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शुक्रवार, 30 मार्च 2012

’गुफ्तगू’ के परिशिष्ट कालम में शामिल होने के लिए


हिन्दुस्तानी साहित्य की त्रैमासिक पत्रिका ‘गुफ्तगू’ के हर अंक में किसी एक शायर अथवा कवि को सहयोग आधार पर परिशिष्ट के रूप शामिल किया जाता है। जिसके अंतर्गत कवि को 32 पेज दिया जाता है और कवर पेज पर भी उसी कवि की तस्वीर होती है। अंदर के 32 पेजों पर शायर का परिचय, उसकी ग़ज़लें,कविताएं और दो-तीन लोगों का समीक्षात्मक लेख शामिल किया जाता है, समीक्षात्मक लेख कवि की रचनाओं पर आधारित होता है। फिलहाल गुफ्तगू की छह हजार प्रतियां छप रही हैं,  जो तमाक अप्रवासी भारतीयों के पास भी जा रही हैं। परिशिष्ट कालम में शामिल होने वाले कवि को उस अंक की दो सौ प्रतियां प्रदान की जाती है, और यदि कवि की इच्छा हो तो इलाहाबाद में उसे बुलाकर उस अंक का विमोचन समारोह भी किया जाता है। अब तक पद्मश्री बेकल उत्साही, कैलाश गौतम, नवाब शाहाबादी, मक़बूल हुसैन जायसी, सुनील दानिश, धनंजय कुमार, अक्षय गोजा, अरमान ग़ाज़ीपुरी, कृष्ण कुमार यादव, हसन सिवानी, किशन स्वरूप, नाशाद औरंगाबादी, अजय अज्ञात, मंजूर बाकराबादी, मोनिका नामदेव, भगवान स्वरूप चैतन्य, राज पटनवी और सुरेन्द्र नाथ नूतन के एक-एक परिशिष्ट प्रकाशित हो चुके हैं, जबकि फरमूद इलाहाबादी, जलाल फूलपुरी और सुरेश चंद्र श्रीवास्तव के दो-दो परिशिष्ट प्रकाशित हुए हैं।
परिशिष्ट में शामिल होने के लिए मोबाइल नंबर 9889316790 पर बात करें।

गुफ्तगू के शखि़सयत कालम के बारे में


’गुफ्तगू’ के शखि़सयत कालम में उन पत्रकारों का इंटरव्यू प्रकाशित किया जाता है, जिनकी आयु 50 वर्ष से अधिक है और वे किसी दैनिक समाचार पत्र अथवा टीवी चैनल में कार्यरत रहे हों या मौजूदा समय में भी कार्यरत हों। अब तक इस कालम में नरेश मिश्र, सुभाष राय,श्रीधर द्विवेदी, बीएस दत्ता और सुधांशु उपाध्याय की शखि़्सयत प्रकाशित हो चुकी है। आप भी अपने शहर के वरिष्ठ पत्रकारों से बातचीत कर उनकी जीवनी प्रकाशित करने के लिए भेज सकते हैं। 
इंटरव्यू करने से पहले मोबाइल नंबर 09889316790 पर अवश्य बात कर लें।

शनिवार, 3 मार्च 2012

गुफ़्तगू पत्रिका का आनलाईन विमोचन व मुशायरा धूमधाम से सम्पन्न

पुलिसकर्मी भी कर सकता है बेहतरीन शायरी
    गुफ्तगू केे इश्क सुल्तानपुरी अंक के विमोचन पर डीआईजी कार्मिक ने कहा

इलाहाबाद। एक पुलिसकर्मी हमेशा डंडा ही नहीं चलाता बल्कि कलम उठाकर अपनी अभिव्यक्ति भी खूबसूरती से व्यक्त कर सकता है। इश्क सुल्तानपुरी ने इस को बेहतरीन ढंग से करके दिखाया है। इन्होंने अपनी काव्य सृजन की क्षमता अवगत करा दिया है। यह बात डीआईजी कार्मिक लाल शुक्ल ने ‘गुफ्तगू’ के इश्क सुल्तानपुरी अंक के विमोचन के अवसर पर कही। उन्होंने कहा कि इश्क साहब की शायरी को लोगों तक लाने में गुफ्तगू पत्रिका ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है,पत्रिका का यही कार्य इसे अन्य पत्रिकाओं से अलग करता है। शनिवार को हिन्दुस्तानी एकेडेमी में पत्रिका का विमोचन भी मुख्य अतिथि लाल जी शुक्ल ने किया, कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ शायर डा. जमीर अहसन ने की, जबकि अति विशिष्टि अतिथि के रूप में न्यायमूर्ति प्रेम शंकर गुप्त मौजूद रहे। डाॅ. जमीर अहसन ने अपने वक्तव्य में कहा कि इस पत्रिका ने कई उल्लेखनीय कार्य किए गए हैं, खासतौर पर बड़े शायरों के साथ ही नए उभरते हुए रचनाकारों को सम्मान के साथ जगह दी है, इश्क सुल्तानपुरी अंक भी इसी बात की गवाही देता है। न्यायमूर्ति प्रेम शंकर गुप्त ने इश्क सुल्तापुरी की शायरी के साथ ही गुफ्तगू पत्रिका के प्रयासों की सराहना की और कहाकि पत्रिका ने अपने बेहतरीन काम के जरिए देशभर काफी नाम कमाया है, इसके उल्लेखनीय कार्यों की चर्चा आज हर साहित्यिक परिचर्चाओं की जा रही है।
वरिष्ठ पत्रकार मुनेश्वर मिश्र ने कहा कि गुफ्तगू पत्रिका शुरूआत आज नौ साल पहले हुई थी, निरंतर प्रकाशित हो रही इस पत्रिका ने साबित कर दिया है कि मेहनत और इमानदारी के साथ काम किया जाए तो कामयाबी जरूर मिलेगी। आज के युग में साहित्यिक पत्रिका इतनी कामयाबी से साथ प्रकाशित करना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन गुफ्तगू की टीम से इस चुनौती का साहस के साथ सामना किया है और कामयाबी हासिल की है।पत्रिका के मुख्य संरक्षक इम्तियाज अहमद गाजी ने कार्यक्रम की भूमिका पेश करते हुए बताया कि आज गुफ्तगू पत्रिका  का आॅनलाइन विमोचन भी कर दिया गया है, इसी के साथ अब पत्रिका इंटरनेअ के माध्यम से पूरी दुनिया पढ़ी जा सकेगी। कहा कि साहित्य की दुनिया में कदम रखने वाले नए लोगों की हौसलाअफाजाई की जानी चाहिए, न कि उन्हें छुरी-चैंकी दिखानी चाहिए। जब तक नए लोगों को प्र्रोत्साहित नहीं किया जाएगा तब तक नए लोग नहीं जुड़ेंगे। श्री गाजी ने कहा कि एक नया लिखने वाले सूर,निराला, गालिब और मीर की तरह का शायर नहीं हो सकता। धीरे-धीरे ही उसमें परिवक्ता आती है, और इश्क सुल्तानपुरी की शायरी को भी इसी नज़रिए से देखना चाहिए। कार्यक्रम के संयोजक शिवपूजन सिंह ने साहित्यिक आयोजन कराना आज के दौर में एक बड़ी चुनौती है, लेकिन गुफ्तगू परिवार ने कुछ लोगों के सहयोग से समय-समय पर आयोजन कराया है और आपलोगों का सहयोग मिलता रहा तो यह प्रयास आगे भी जारी रहेगा। सीमैट की प्राचार्या सुश्री भावना शिक्षार्थी ने कहा कि आज के दौर में इमानदारी के साथ काम करना आसान नहीं है,लेकिन गुफ्तगू पत्रिका ने यह कार्य कर दिखाया है, निश्चित रूप से हमें इस तरह के कार्यों की सराहना करनी चाहिए। डा.पीयूष दीक्षित, संतोष  तिवारी आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किया।संचालन इम्तियाज अहमद गाजी ने किया।

दूसरे सत्र में मुशायरे का आयोजन किया गया, जिसका संचालन नजीब इलाहाबादी ने किया। बुद्धिसेन शर्मा, फरमूद इलाहाबादी, मखदूख फूलपुरी, जयकृष्ण राय तुषार, राजेश श्रीवास्तव, वीनस केसरी, शकील गाजीपुरी, अजीत शर्मा आकाश, रमेश नाचीज, श्रीरंग पांडेय, विवके सत्यांशु, शादमा जैदी शाद, सतीश कुमार यादव आदि ने कलाम पेश किया।

कार्यक्रम की फोटो देखने के लिए यहाँ क्लिक करें



        


(आनलाईन संस्करण पढ़ने के लिए फोटो पर अथवा यहाँ क्लिक करें)

(पी. डी. एफ. फाईल डाउनलोड करने के लिए यहाँ  क्लिक करें)

(आनलाईन संस्करण नीचे यहाँ से expend करके भी पढ़ सकते हैं )



सोमवार, 27 फ़रवरी 2012

'गुफ़्तगू' पत्रिका का आँनलाईन विमोचन व मुशायरा ३ मार्च २०१२ को

दोस्तों,
          गुफ़्तगू परिवार के लिए हर्ष का विषय है कि  पिछले नौ वर्षों से प्रकाशित हो रही हिन्दुस्तानी साहित्य की पत्रिका ‘गुफ़्तगू’ को इन्टरनेट पर स्थापित किया जा रहा है तथा अब पाठक ‘गुफ़्तगू’ के नये व पुराने अंकों को इन्टरनेट माध्यम से भी पढ़ सकेंगे । दिनांक 03 मार्च 2012 को दोपहर 2 बजे हिन्दुस्तानी एकेडेमी, सिविल लाईन, इलाहाबाद के सभागार में पत्रिका के नव प्रकाशित ‘इश्क सुल्तानपुरी’ अंक (अंक - ३३) के भौतिक विमोचन के साथ साथ पत्रिका का आनलाईन विमोचन भी किया जायेगा तथा इस उपलक्ष्य में दोपहर 03 बजे से  मुशायरे का आयोजन किया गया है । कार्यक्रम की अध्यक्षता डाॅ. ज़मीर अहसन करेंगे, मुख्य अतिथि पुलिस उपमहानिरीक्षक लालजी शुक्ल और अति विशिष्ट अतिथि के रूप में न्यायमूर्ति प्रेमशंकर गुप्त मौजूद रहेंगे। वरिष्ठ पत्रकार मुनेश्वर मिश्र, सीमैट की प्राचार्या सुश्री भावना शिक्षार्थी, डाॅ. राजीव सिंह, डाॅ. पीयूष दीक्षित, धनंजय सिंह और सी आर यादव विशिष्ट अतिथि के रूप में कार्यक्रम में शिरकत करेंगे। इस अवसर पर मुशायरे में बुद्धिसेन शर्मा, एहतराम इस्लाम, यश मालवीय, फरमूद इलाहाबादी, हसनैन मुस्तफाबादी, मखदमू फूलपुरी, रविनंदन सिंह, जयकृष्ण राय 'तुषार', राजेश श्रीवास्तव, शकील ग़ाज़ीपुरी, वीनस केसरी, सौरभ पांडेय, डाॅ. मोनिका नामदेव आदि कवि एवं शायर अपना कलाम पेश करेंगे। इस आयोजन में सभी साहित्य पे्रमी सादर आमंत्रित हैं।



(कार्ड को स्पष्ट देखने के लिए कार्ड पर क्लिक करें)