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मंगलवार, 8 मई 2012

गुफ़्तगू पत्रिका द्वारा ‘तरही मुशायरा’ स्तंभ की शुरुआत


गुफ़्तगू पत्रिका द्वारा अप्रैल- जून २०१२ (अंक – ३४) से तरही मुशायरा’ स्तंभ की शुरुआत की जा रही है, प्राप्त ग़ज़लों में से सर्वश्रेष्ठ दो ग़ज़लों को पुरुस्कृत किया जायेगा और पुरूस्कार स्वरूप गुफ्तगू पत्रिका की ५ साल की सदस्यता प्रदान की जायेगी यदि पुरुस्कृत शायर पहले से गुफ़्तगू पत्रिका के सदस्य होंगे तो गुफ्तगू पब्लिकेशन से प्रकाशित २०० रु मूल्य की साहित्यिक पुस्तक भेंट की जायेगी| तथा पत्रिका के अगले अंक में दोनों पुरुस्कृत ग़ज़लें तथा १० अन्य श्रेष्ठ ग़ज़लों को प्रकाशित किया जायेगा|

अगले अंक के लिए मिसरा-ए-तरह =

‘लो अब तुम्हारी राह के दीवार हम नहीं’
 221   2121  1221  212
बह्र -ए- मुजारे मुसम्मन अखरब मक्फूफ़ महजूफ
मफऊलु फाइलातु मफाईलु फाइलुन
रदीफ: हम नहीं 
काफिया: आर (दीवार, इन्कार, बीमार, तलबगार, खतावार आदि)

ग़ज़ल भेजने की अंतिम तिथि = २० जून २०१२

ग़ज़ल भेजने की शर्त -
१- ग़ज़ल उपरोक्त मिसरा -ए- तरह के अनुरूप हो
२- ग़ज़ल अरूजानुसार दुरुस्त हो तथा अन्य दोष से भी मुक्त हो
३- कम से कम ५ तथा अधिकाधिक ७ शेर हों
४- ग़ज़ल में मक्ता न हो अर्थात अंतिम शेर में तखल्लुस (उपनाम) का प्रयोग न किया गया हो
५- ग़ज़ल में मिसरा-ए-तरह पर गिरह का शेर अवश्य हो, यह ध्यान रहे कि मिसरे की गिरह मतला या हुस्ने मतला में न बांधी गयी हो  
उपरोक्त शर्तों का पालन न करने वाली रचना पर विचार नहीं किया जायेगा

तरही मुशायरा का नियम -
१ – प्राप्त कुल ग़ज़लों में से १२ ग़ज़लों का चयन अरूज के जानकार उस्ताद शायर द्वारा किया जायेगा जिनको ग़ज़लकार का नाम पता नहीं बताया जायेगा

२- एक शायर द्वारा एक से अधिक ग़ज़ल भेजने पर उस शायर की किसी ग़ज़ल पर विचार नहीं किया जायेगा
३- ग़ज़ल के नीचे रचनाकार का पूरा नाम, पूरा पता, पिन कोड, मोबाईल नंबर अंकित रहना अतिआवश्यक है
४- पत्रिका के अपगे अंक में मात्र १२ ग़ज़लें प्रकाशित होंगी, बाकी ग़ज़लों की वापसी संभव नहीं होगी|
(जिन श्रेष्ठ ग़ज़लों को तरही मुशायरा स्तंभ में स्थान नहीं मिल पायेगा उन्हें गुफ्तगू के आगामी अंक में प्रकाशित किया जा सकता है) 
ग़ज़ल भेजने का पता -

सम्पादकीय कार्यालय गुफ़्तगू पत्रिका
इम्तियाज़ अहमद गाज़ी
१२३ ए /१, हरवारा
धूमनगंज, इलाहाबाद
पिन -२११०११
मो. - 0889316790, 9839942005

ग़ज़ल  ई-मेल से भी भेज सकते हैं  -
guftgu007@rediffmail.com


2 टिप्‍पणियां:

  1. भाई गाज़ी साहब, इस दुरुस्त इनिशिएटिव के लिये बधाई कुबूल फ़रमायें. वीनस भाई की ज़िन्दादिल कोशिश के लिये उन्हें ढेरम्ढेर शुभकामनाएँ.

    -सौरभ पाण्डेय, नैनी, इलाहाबाद (उप्र)

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  2. आयोजन की बहुत सारी शुभकामनाएं !! इंटर नेट पर साहित्यिक सेतुमय प्रयास के लिए गुफ्तगू को हार्दिक साधुवाद !!

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